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अध्याय 9 · 34 श्लोक
राजविद्याराजगुह्ययोगः

राजविद्याराजगुह्ययोग

भक्ति-योग का महत्व — अनन्य भाव से भजन करने वालों के प्रति ईश्वर की सुलभता; "सबसे गुह्य ज्ञान" के रूप में प्रस्तुत।

इस अध्याय के लिए विस्तृत श्लोक-दर-श्लोक व्याख्या अभी संपादकीय समीक्षा में है — शीघ्र जोड़ी जाएगी।

यहाँ दी गई "सरल व्याख्या" एवं "व्यावहारिक जीवन-शिक्षा" Sanatan Unity की अपनी सरलीकृत प्रस्तुति है — यह किसी विशिष्ट पारंपरिक भाष्य (जैसे शंकराचार्य/रामानुजाचार्य/मध्वाचार्य भाष्य) का प्रतिस्थापन नहीं है।
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