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अध्याय 11 · 55 श्लोक
विश्वरूपदर्शनयोगः

विश्वरूपदर्शनयोग

अर्जुन की प्रार्थना पर श्रीकृष्ण अपना विराट/विश्वरूप दिखाते हैं — गीता का सर्वाधिक चित्रित एवं नाटकीय प्रसंग।

इस अध्याय के लिए विस्तृत श्लोक-दर-श्लोक व्याख्या अभी संपादकीय समीक्षा में है — शीघ्र जोड़ी जाएगी।

यहाँ दी गई "सरल व्याख्या" एवं "व्यावहारिक जीवन-शिक्षा" Sanatan Unity की अपनी सरलीकृत प्रस्तुति है — यह किसी विशिष्ट पारंपरिक भाष्य (जैसे शंकराचार्य/रामानुजाचार्य/मध्वाचार्य भाष्य) का प्रतिस्थापन नहीं है।
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