आध्यात्म एवं मानव चेतना
ध्यान, समाधि, प्राणायाम, जप, धारणा, प्रत्याहार, तपस्या, मौन, सिद्धियाँ — योग-परंपरा में वर्णित साधना-मार्ग।
ध्यान
ध्यान का अर्थ है मन को किसी एक विषय/बिंदु पर निरंतर, बिना विक्षेप के केंद्रित करना — पतंजलि के योगसू…
समाधि
समाधि अष्टांग योग का आठवाँ एवं अंतिम अंग है — इसमें ध्याता (ध्यान करने वाला), ध्यान (क्रिया) एवं ध्य…
प्राणायाम
प्राणायाम श्वास के नियमन के माध्यम से प्राण (जीवन-ऊर्जा) को नियंत्रित करने की विधि है — अष्टांग योग …
जप
जप का अर्थ है किसी मंत्र, नाम अथवा शब्द की निर्धारित संख्या में (सामान्यतः 108 की माला द्वारा) पुनरा…
धारणा
धारणा अष्टांग योग का छठा अंग है — मन को किसी एक बिंदु/वस्तु पर बलपूर्वक केंद्रित करने का प्रारंभिक अ…
प्रत्याहार
प्रत्याहार अष्टांग योग का पाँचवाँ अंग है — इंद्रियों को बाह्य विषयों से हटाकर अंतर्मुखी करने का अभ्य…
तपस्या
तपस्या का अर्थ है किसी आध्यात्मिक/भौतिक लक्ष्य हेतु स्वेच्छा से कठोर संयम, त्याग अथवा साधना करना — प…
मौन
मौन (वाणी-संयम) का अभ्यास मन की चंचलता को कम करने एवं आंतरिक ऊर्जा को संरक्षित करने की एक परंपरागत स…
अष्ट सिद्धियाँ (अणिमा आदि)
योग एवं पौराणिक परंपरा में गहन साधना से प्राप्त होने वाली आठ विशेष सिद्धियों (क्षमताओं) का वर्णन मिल…
मानव चेतना और संभावनाएँ
ध्यान, प्राणायाम, मंत्र-जप एवं योग के माध्यम से मानव-चेतना की संभावनाओं पर परंपरा एवं आधुनिक शोध की संतुलित समीक्षा।