समाधि
समाधि
समाधि अष्टांग योग का आठवाँ एवं अंतिम अंग है — इसमें ध्याता (ध्यान करने वाला), ध्यान (क्रिया) एवं ध्येय (जिस पर ध्यान किया जा रहा हो) का भेद समाप्त हो जाता है, तथा चेतना पूर्णतः ध्येय में लीन हो जाती है।
विधि
यह किसी एक तकनीक के बजाय ध्यान के गहनतम, स्वतःस्फूर्त विकास की अवस्था मानी जाती है — योगसूत्र में इसके सम्प्रज्ञात एवं असम्प्रज्ञात जैसे भेद भी वर्णित हैं।
परंपरागत लाभ
योग-परंपरा में समाधि को कैवल्य/मोक्ष के निकटतम अवस्था माना जाता है।
इस अभ्यास पर किसी विशिष्ट, सत्यापित वैज्ञानिक अध्ययन का संदर्भ अभी उपलब्ध नहीं है — यह विवरण परंपरागत स्रोतों पर आधारित है।