अष्ट सिद्धियाँ (अणिमा आदि)
योग एवं पौराणिक परंपरा में गहन साधना से प्राप्त होने वाली आठ विशेष सिद्धियों (क्षमताओं) का वर्णन मिलता है: अणिमा (अणु के समान सूक्ष्म हो जाना), महिमा (विशाल हो जाना), गरिमा (अत्यंत भारी हो जाना), लघिमा (अत्यंत हल्का हो जाना), प्राप्ति (किसी भी वस्तु को प्राप्त करने की क्षमता), प्राकाम्य (इच्छाओं की अबाध पूर्ति), ईशित्व (सृष्टि पर स्वामित्व) एवं वशित्व (सभी प्राणियों/तत्त्वों पर नियंत्रण)।
विधि
योग-परंपरा के अनुसार ये सिद्धियाँ दीर्घकालिक, गहन योग-साधना (विशेषकर समाधि-अभ्यास) के उपोत्पाद के रूप में स्वतःस्फूर्त प्रकट होती हैं — इन्हें स्वयं में साधना का लक्ष्य बनाने के विरुद्ध पतंजलि के योगसूत्र में ही चेतावनी दी गई है (ये समाधि-मार्ग में विघ्न भी बन सकती हैं)।
परंपरागत लाभ
योगसूत्र (विभूतिपाद) में इनका विस्तृत वर्णन मिलता है — पारंपरिक रूप से इन्हें साधना-पथ का एक चरण, अंतिम लक्ष्य नहीं माना जाता।