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📜 ग्रंथ प्रमाण vedic
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
oṁ tryambakaṁ yajāmahe sugandhiṁ puṣṭi-vardhanam, urvārukam iva bandhanān mṛtyor mukṣīya māmṛtāt

देवता: शिव

हिन्दी अर्थ

हम त्रिनेत्रधारी (शिव) की उपासना करते हैं, जो सुगंध-स्वरूप एवं समृद्धि प्रदान करने वाले हैं। जैसे पका हुआ ककड़ी-फल अपनी बेल से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृतत्व से वंचित न रखें। (ऋग्वेद 7.59.12 में मूल रूप — यजुर्वेद में भी प्राप्त)

प्रयोग

स्वास्थ्य-लाभ, दीर्घायु एवं संकट-निवारण हेतु जप की परंपरा।

परंपरागत नियम

यह एक अत्यंत पवित्र मंत्र माना जाता है — इसका जप स्वास्थ्य-समस्याओं में चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं, अपितु उसके साथ की जाने वाली एक श्रद्धा-आधारित परंपरा है (देखें /disclaimer)।

जप-नियम एवं विधि विभिन्न परंपराओं/सम्प्रदायों में भिन्न हो सकते हैं — किसी योग्य गुरु से मार्गदर्शन लेना उचित है।