सामवेदसंहिता
सामवेद
सामवेद यज्ञों में गायन हेतु प्रयुक्त वेद है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति की चर्चा में सामगान को प्रायः एक प्रारंभिक स्रोत के रूप में उद्धृत किया जाता है — यह एक व्यापक रूप से चर्चित परंपरागत/ऐतिहासिक संबंध है, न कि आधुनिक संगीत-शास्त्र की सिद्ध वंशावली।
परंपरागत मत: अनादि/अपौरुषेय (परंपरागत मत)।
शैक्षणिक कालनिर्धारण: सामवेद के अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से ही लिए गए हैं (लगभग 75), इसलिए इसकी स्वतंत्र भाषिक तिथि निर्धारित करना कठिन है — यह मुख्यतः ऋग्वेद की सामग्री का गायन-केंद्रित पुनर्व्यवस्थीकरण है।
संरचना
मुख्यतः दो भागों में — पूर्वार्चिक एवं उत्तरार्चिक। इसकी विशिष्टता मंत्रों की विषयवस्तु में नहीं, अपितु उनके गायन (सामगान) की जटिल स्वर-पद्धति में है।