नटराज का तांडव — सृष्टि का लयबद्ध चक्र
शिव के "नटराज" (नृत्य के राजा) रूप में उनके ब्रह्मांडीय नृत्य (तांडव) को सृष्टि, स्थिति (पालन) एवं प्रलय (संहार) के चक्रीय स्वरूप के प्रतीक के रूप में दर्शाया जाता है। नटराज की प्रतिमा में शिव का एक पैर अपस्मार (अज्ञान के दानव) को कुचलता दिखाया जाता है, तथा चारों भुजाओं में डमरू (सृष्टि की ध्वनि), अग्नि (प्रलय), अभय-मुद्रा (रक्षा) एवं इंगित हाथ (मुक्ति का मार्ग) प्रतीकात्मक रूप से दर्शाए जाते हैं।
अर्थ
नटराज की प्रतिमा सृष्टि-पालन-प्रलय के चक्रीय, निरंतर चलने वाले ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतीकात्मक चित्रण है।
नैतिक शिक्षा
परिवर्तन (सृष्टि एवं विनाश दोनों) जीवन का एक अनिवार्य, निरंतर चलने वाला लय है — इसे भय के बजाय संतुलित दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
भिन्न संस्करण: चिदंबरम मंदिर (तमिलनाडु) नटराज-उपासना का एक प्रमुख केंद्र है — नटराज-प्रतिमा की प्रतीकात्मक व्याख्या पर विभिन्न आचार्यों एवं कला-इतिहासकारों के विवरण में सूक्ष्म भिन्नता पाई जाती है।