गणेश को गजमुख कैसे मिला
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने स्नान के समय द्वारपाल हेतु अपने उबटन से एक बालक (गणेश) की रचना की एवं उसे द्वार पर पहरा देने हेतु नियुक्त किया। जब शिव आए तो अनजान बालक ने उन्हें भी रोक दिया, जिससे क्रुद्ध होकर शिव ने बालक का सिर काट दिया। पार्वती के विलाप पर शिव ने प्रथम मिलने वाले प्राणी (हाथी के बच्चे) का सिर जोड़कर बालक को पुनर्जीवित किया — इस प्रकार गणेश को गजमुख प्राप्त हुआ।
अर्थ
यह कथा गणेश के गजमुख की उत्पत्ति बताती है तथा शिव-पार्वती के पारिवारिक संबंधों को दर्शाती है।
नैतिक शिक्षा
क्रोध के परिणामों एवं क्षति की भरपाई की संभावना — दोनों की सीख इस कथा में निहित है।
भिन्न संस्करण: यह कथा विभिन्न पुराणों (शिव पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण आदि) में अलग-अलग विवरण के साथ वर्णित है — विवरण के बिंदुओं में भिन्नता पाई जाती है, मूल कथा-सार समान है।