प्राण एवं नाड़ी विज्ञान
योगसूत्र एवं हठयोग ग्रंथ
योग एवं तांत्रिक परंपरा में "प्राण" को जीवन-ऊर्जा तथा "नाड़ी" को इस ऊर्जा के प्रवाह-मार्ग (सूक्ष्म शरीर में) के रूप में वर्णित किया जाता है, जिनमें इड़ा, पिंगला एवं सुषुम्ना को प्रमुख माना जाता है।
प्राणायाम अभ्यास के माध्यम से प्राण के नियमन को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है।
स्नायु तंत्र (Nervous System) / श्वसन-शरीरक्रिया विज्ञान (Respiratory Physiology)
आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान में नियंत्रित श्वसन (जैसे प्राणायाम-आधारित अभ्यासों) के तनाव-न्यूनीकरण एवं स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) पर प्रभाव के संबंध में कुछ अध्ययन उपलब्ध हैं — परंतु "नाड़ी" (सूक्ष्म शरीर की ऊर्जा-वाहिनी के रूप में) का भौतिक स्नायु-तंत्र से सीधा, सिद्ध शारीरिक समतुल्य होना वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है।