गुरुत्वाकर्षण (गुरुत्व)
वैशेषिक सूत्र · अध्याय 5, आह्निक 1 · श्लोक/सूत्र 5.1.7
प्राचीन अवधारणा (हिन्दी अनुवाद)
वैशेषिक सूत्र में "गुरुत्व" नामक एक गुण की चर्चा है, जिसे वस्तुओं के पतन (गिरने) का कारण बताया गया है — जल में पत्थर के डूबने एवं वस्तुओं के नीचे गिरने की प्रवृत्ति के संदर्भ में।
परंपरागत व्याख्या
वैशेषिक परंपरा में "गुरुत्व" को द्रव्य के एक अंतर्निहित गुण के रूप में देखा गया, जो पतन की प्रवृत्ति उत्पन्न करता है — परंतु यह एक गुणात्मक (qualitative) दार्शनिक अवलोकन है।
आधुनिक वैज्ञानिक अवधारणा
न्यूटन का सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम (Newtonian Gravity)
न्यूटन का नियम (1687) दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का एक सटीक गणितीय सूत्र (F = G·m₁m₂/r²) प्रस्तुत करता है, जो द्रव्यमान, दूरी एवं बल के बीच परिमाणात्मक (quantitative) संबंध स्थापित करता है — इसकी भविष्यवाणी-क्षमता का बार-बार प्रायोगिक सत्यापन हुआ है।
वैज्ञानिक स्थिति — 🔵 आधुनिक विज्ञान से समानता
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यह उदाहरण सीधे स्पष्ट करता है: "प्राचीन ग्रंथ पतन/भारीपन ('गुरुत्व') की चर्चा करते हैं, परंतु इसमें न्यूटन के सार्वभौमिक गणितीय नियम के समतुल्य कुछ नहीं है — दोनों को समान मानना ऐतिहासिक रूप से अशुद्ध होगा।" वैशेषिक सूत्र में गुणात्मक अवलोकन है, परिमाणात्मक भविष्यवाणी-सक्षम नियम नहीं।
📚 स्रोत
मूल ग्रंथ: वैशेषिक सूत्र (5.1.7)
अकादमिक संदर्भ: Halbfass, Wilhelm — "On Being and What There Is: Classical Vaisheshika and the History of Indian Ontology" (State University of New York Press) — वैशेषिक तत्त्व-मीमांसा का अकादमिक अध्ययन।
अंतिम समीक्षा: 15 Jan 2026