अणु सिद्धांत (परमाणुवाद)
वैशेषिक सूत्र · अध्याय 4 · श्लोक/सूत्र 4.1.1 (सामान्य संदर्भ)
वैशेषिक दर्शन में यह प्रतिपादित किया गया कि समस्त भौतिक द्रव्य अविभाज्य, नित्य "परमाणुओं" से बने हैं, जो परस्पर संयोग से बड़ी वस्तुओं (द्व्यणुक, त्र्यणुक आदि) की रचना करते हैं।
यह एक दार्शनिक तत्त्व-मीमांसा (metaphysics) थी, जिसका उद्देश्य द्रव्य की स्थिरता एवं परिवर्तन की व्याख्या करना था — इसे प्रायोगिक भौतिकी की पद्धति से सिद्ध नहीं किया गया था, अपितु तार्किक/दार्शनिक निगमन (reasoning) से प्रस्तुत किया गया।
आधुनिक परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) — डाल्टन, थॉमसन, रदरफोर्ड आदि द्वारा विकसित
आधुनिक परमाणु सिद्धांत प्रायोगिक भौतिकी/रसायनशास्त्र पर आधारित है, जिसमें परमाणु की आंतरिक संरचना (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन), इसके गुण एवं व्यवहार का सटीक, मापनीय एवं प्रयोगों द्वारा बार-बार सत्यापित विवरण उपलब्ध है — यह वैशेषिक सूत्र के दार्शनिक निगमन से गुणात्मक रूप से भिन्न है।