होम सनातन ज्ञान ग्रंथ वेद उपनिषद पुराण भगवद्गीता ऋषि एवं आचार्य देवता पवित्र स्थान विज्ञान एवं प्राचीन ज्ञान प्राचीन तकनीक दर्शन आध्यात्म एवं चेतना मंत्र एवं साधना पूजा विधि कर्म पुनर्जन्म 84 लाख योनियाँ असुर एवं अन्य लोक कहानियाँ पर्व और त्योहार आध्यात्मिक मार्गदर्शन खोजें संपर्क करें JOIN SANATAN
📜 ग्रंथ प्रमाण जीवनी-विश्वसनीयता: परंपरागत
याज्ञवल्क्य

याज्ञवल्क्य

काल (परंपरागत): वैदिक उत्तरकाल (परंपरागत) · परंपरा: शुक्ल यजुर्वेद / उपनिषद परंपरा

याज्ञवल्क्य बृहदारण्यक उपनिषद के केंद्रीय ऋषि हैं, जिनके अपनी पत्नी मैत्रेयी से आत्मा की प्रकृति पर हुए संवाद ("मैत्रेयी संवाद") के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। शुक्ल यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता का श्रेय भी परंपरा में इन्हें दिया जाता है।

शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित संवादों के आधार पर विद्वान इन्हें वैदिक साहित्य के उत्तरकालीन, उपनिषद-कालीन ऋषियों में गिनते हैं।

योगदान

वेदांत दर्शन की आरंभिक नींव में योगदान।

शिक्षाएँ

आत्मा, ब्रह्म एवं मोक्ष पर गहन दार्शनिक संवाद — "आत्मा ही अंततः प्रिय है" जैसी शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध।

संबंधित ग्रंथ

बृहदारण्यक उपनिषद, शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता), याज्ञवल्क्य स्मृति

रचनाएँ / संबद्ध ग्रंथालय-प्रविष्टियाँ