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📜 ग्रंथ प्रमाण जीवनी-विश्वसनीयता: परंपरागत
पतञ्जलि

पतंजलि

काल (परंपरागत): ई.पू. दूसरी शताब्दी (परंपरागत अनुमान) · परंपरा: योग दर्शन

महर्षि पतंजलि को "योगसूत्र" का रचयिता माना जाता है, जिसमें अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) की व्यवस्थित रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: योगसूत्र के रचयिता पतंजलि, महाभाष्य के रचयिता पाणिनि-भाष्यकार पतंजलि, तथा आयुर्वेद पर एक ग्रंथ के रचयिता पतंजलि — इन तीनों के एक ही व्यक्ति होने पर विद्वानों में मतभेद है। योगसूत्र का समय सामान्यतः ई.पू. दूसरी शताब्दी से ई. चौथी शताब्दी के बीच माना जाता है।

योगदान

योग दर्शन को एक व्यवस्थित शास्त्र के रूप में संहिताबद्ध करने का श्रेय — आधुनिक योग-अभ्यास की दार्शनिक नींव।

शिक्षाएँ

अष्टांग योग की पद्धति; चित्तवृत्ति निरोध के रूप में योग की परिभाषा ("योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः")।

प्रसिद्ध कथन

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः (योगसूत्र 1.2)

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योगसूत्र

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