कपिल मुनि
कपिल
काल (परंपरागत): प्राचीन काल (सटीक तिथि अनिश्चित) · परंपरा: सांख्य दर्शन
महर्षि कपिल को सांख्य दर्शन का प्रवर्तक माना जाता है — यह दर्शन पुरुष (चेतना) एवं प्रकृति (जड़ तत्त्व) के द्वैत सिद्धांत पर आधारित है।
शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: सांख्यसूत्र का वर्तमान स्वरूप कणाद/कपिल के परंपरागत काल से बहुत बाद का माना जाता है; कपिल के मौलिक सांख्य-दर्शन की सामग्री ईश्वरकृष्ण की "सांख्यकारिका" (लगभग चौथी शताब्दी ई.) के माध्यम से अधिक स्पष्ट रूप से हमें प्राप्त होती है।
योगदान
योग दर्शन का सैद्धांतिक आधार — पतंजलि का योगसूत्र सांख्य के तत्त्व-सिद्धांत पर निर्भर करता है।
शिक्षाएँ
पुरुष-प्रकृति द्वैतवाद; 25 तत्त्वों का वर्गीकरण; त्रिगुण (सत्त्व, रजस्, तमस) सिद्धांत।
संबंधित ग्रंथ
सांख्यसूत्र (परंपरागत श्रेय); सांख्यकारिका (ईश्वरकृष्ण द्वारा)