चरक
चरक
काल (परंपरागत): सटीक तिथि अनिश्चित (अनुमानतः ई.पू. प्रथम शताब्दी – ई. द्वितीय शताब्दी) · परंपरा: आयुर्वेद
चरक को आयुर्वेद के "चरक संहिता" ग्रंथ के प्रमुख संपादक/प्रणेता के रूप में जाना जाता है, जो शरीरक्रिया विज्ञान, रोग निदान एवं चिकित्सा सिद्धांतों पर केंद्रित है।
शैक्षणिक कालनिर्धारण-टिप्पणी: "चरक संहिता" का वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों में विकसित हुआ माना जाता है — मूल अग्निवेश तंत्र का चरक द्वारा प्रतिसंस्कार (संपादन) किया गया, और बाद में दृढ़बल द्वारा भी संशोधन हुआ।
योगदान
आयुर्वेद चिकित्सा-शास्त्र की सैद्धांतिक नींव — आज भी भारत में एक मान्यता-प्राप्त चिकित्सा पद्धति के रूप में जीवित।
शिक्षाएँ
त्रिदोष सिद्धांत (वात, पित्त, कफ); रोग निदान एवं चिकित्सा की व्यवस्थित पद्धति; निवारक स्वास्थ्य (स्वास्थ्यवृत्त) पर बल।
संबंधित ग्रंथ
चरक संहिता