संध्या वंदन
दिन के तीन संधि-कालों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में की जाने वाली पारंपरिक वैदिक उपासना-विधि।
आवश्यक सामग्री
जल-पात्र (आचमन/अर्घ्य हेतु)।
विधि (चरण)
1. आचमन (शुद्धिकरण)। 2. प्राणायाम। 3. सूर्य को अर्घ्य। 4. गायत्री मंत्र-जप। 5. उपस्थान (समापन-प्रार्थना)।
प्रयुक्त मंत्र
गायत्री मंत्र मुख्य रूप से।
परंपरागत अर्थ
परंपरागत रूप से यह द्विज (उपनयन-संस्कार प्राप्त) वर्ग हेतु नियत दैनिक कर्तव्य माना जाता था।
क्षेत्रीय भिन्नताएँ: विधि का विस्तार वैदिक शाखा-परंपरा (जैसे यजुर्वेदी, ऋग्वेदी) के अनुसार भिन्न होता है।
यह विधि एक सामान्य/व्यापक रूप से प्रचलित रूपरेखा है — यह किसी विशेष सम्प्रदाय/परिवार-परंपरा की एकमात्र "सही" विधि होने का दावा नहीं करती।