योग
योग दर्शन
योग दर्शन सांख्य के तत्त्व-सिद्धांत को स्वीकार करते हुए चित्तवृत्तियों के निरोध (मन की चंचलता को शांत करने) की व्यावहारिक पद्धति प्रस्तुत करता है — अष्टांग योग के माध्यम से।
पाठ्य आधार
योगसूत्र (पतंजलि)
प्रमुख चिंतक
महर्षि पतंजलि
आत्मा/स्वयं की अवधारणा
पुरुष — सांख्य के समान, परंतु योग में ईश्वर (एक विशेष पुरुष, क्लेशों से सर्वथा मुक्त) की अवधारणा भी सम्मिलित है।
यथार्थ की अवधारणा
सांख्य के समान द्वैतवाद, परंतु ईश्वर की स्वीकृति के साथ (सेश्वर सांख्य कहा जा सकता है)।
मोक्ष का मार्ग
अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) के माध्यम से चित्तवृत्ति-निरोध से कैवल्य (मोक्ष)।
विभिन्न परंपराओं में व्याख्या-भेद: आधुनिक लोकप्रिय "योग" (मुख्यतः आसन-केंद्रित) पतंजलि के योगसूत्र के आठ अंगों में से केवल एक अंग (आसन) पर केंद्रित है — यह भेद स्पष्ट रूप से समझा जाना आवश्यक है।