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📜 ग्रंथ प्रमाण vedic
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
oṁ bhūr bhuvaḥ svaḥ tat savitur vareṇyaṁ bhargo devasya dhīmahi dhiyo yo naḥ pracodayāt

देवता: सूर्य

हिन्दी अर्थ

हम उस श्रेष्ठ, तेजस्वी सविता (सूर्य) देव का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे। (ऋग्वेद 3.62.10)

प्रयोग

दैनिक संध्या-वंदन (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में जप की परंपरा।

परंपरागत नियम

परंपरागत रूप से उपनयन संस्कार के पश्चात जप का अधिकार माना जाता था; आधुनिक समय में इसका जप व्यापक रूप से सभी द्वारा किया जाता है।

जप-नियम एवं विधि विभिन्न परंपराओं/सम्प्रदायों में भिन्न हो सकते हैं — किसी योग्य गुरु से मार्गदर्शन लेना उचित है।