देवलोक (स्वर्गलोक)
स्रोत: पुराण, भगवद्गीता (अध्याय 9)
पौराणिक ब्रह्मांड-रचना में देवताओं के निवास-स्थान के रूप में वर्णित लोक, जिसके अधिपति इंद्र माने जाते हैं। सत्कर्मों के फलस्वरूप अस्थायी रूप से यहाँ जन्म मिलने की अवधारणा पुराणों में मिलती है — यह स्थायी मोक्ष से भिन्न, पुण्य-फल की समाप्ति पर पुनः संसार-चक्र में लौटने वाली अवस्था मानी जाती है।
पौराणिक/धार्मिक अवधारणा: इसे वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा — यह धार्मिक/पौराणिक विश्वदृष्टि का भाग है।