अक्षय तृतीया
एक अत्यंत शुभ माना जाने वाला दिन, जिसका नाम ही "अक्षय" (जो कभी क्षीण न हो) से पड़ा है — नए कार्यों के आरंभ, स्वर्ण-क्रय आदि हेतु शुभ माना जाता है।
कथा
परशुराम-जयंती इसी दिन मनाई जाती है; महाभारत में इसी दिन द्रौपदी को अक्षय पात्र (जो कभी खाली न हो) की प्राप्ति की कथा भी वर्णित है।
पूजा-विधि
दान-पुण्य, नए कार्यों का शुभारंभ, स्वर्ण-आभूषण क्रय की परंपरा।
तिथि-गणना
वैशाख मास की तृतीया को — सामान्यतः अप्रैल-मई।
क्षेत्रीय भिन्नताएँ: पुरी के जगन्नाथ मंदिर में इसी दिन रथ-यात्रा हेतु रथ-निर्माण का कार्य आरंभ होता है।