राम
श्रीराम
अन्य नाम: रघुनाथ, रघुपति, मर्यादा पुरुषोत्तम
श्रीराम विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं तथा वाल्मीकि-रामायण के केंद्रीय नायक हैं। इन्हें "मर्यादा पुरुषोत्तम" (आदर्श मर्यादाओं का पालन करने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरुष) कहा जाता है।
प्रतीकात्मकता
धनुष-बाण (धर्म-रक्षा हेतु शक्ति), मर्यादा (आदर्श आचरण)।
स्वरूप
रामलला (बाल रूप), राम-दरबार (सीता, लक्ष्मण, हनुमान सहित)।
कथाएँ
वनवास, सीता-हरण, हनुमान एवं वानर-सेना की सहायता से लंका पर विजय, रावण-वध, अयोध्या वापसी एवं राज्याभिषेक — रामायण की केंद्रीय कथा।
उपासना
रामचरितमानस एवं रामायण का पाठ, "श्रीराम जय राम जय जय राम" जप।
विभिन्न सम्प्रदायों (वैष्णव/शैव/शाक्त) में इस देवता/देवी की व्याख्या एवं महत्व भिन्न हो सकता है — यह पृष्ठ किसी एक परंपरा को सार्वभौमिक नहीं मानता।