कृष्ण
श्रीकृष्ण
अन्य नाम: गोविंद, माधव, वासुदेव, द्वारकाधीश
श्रीकृष्ण विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं तथा भगवद्गीता के उपदेशक एवं भागवत पुराण के केंद्रीय नायक हैं। इनका जीवन बाल-लीला (वृंदावन) से लेकर राजनैतिक/दार्शनिक मार्गदर्शक (कुरुक्षेत्र) तक विस्तृत है।
प्रतीकात्मकता
बाँसुरी (आनंद/लीला), मोरपंख (सौंदर्य), गोपाल रूप (सरलता)।
स्वरूप
बाल गोपाल (बाल रूप), राधा-कृष्ण (भक्ति रूप), पार्थसारथी (गीता-उपदेशक रूप)।
कथाएँ
बाल-लीलाएँ (माखन-चोरी, कालिया-दमन), रासलीला, कंस-वध, महाभारत में अर्जुन के सारथी एवं गीता-उपदेशक, द्वारकाधीश के रूप में राज्य-संचालन।
उपासना
भगवद्गीता पाठ, "हरे कृष्ण" महामंत्र (गौड़ीय वैष्णव परंपरा में विशेष), रासलीला-स्मरण।
विभिन्न सम्प्रदायों (वैष्णव/शैव/शाक्त) में इस देवता/देवी की व्याख्या एवं महत्व भिन्न हो सकता है — यह पृष्ठ किसी एक परंपरा को सार्वभौमिक नहीं मानता।