राक्षस
स्रोत: रामायण, महाभारत, पुराण
राक्षस पौराणिक साहित्य में वर्णित एक अन्य वर्ग के प्राणी हैं, जिन्हें प्रायः रात्रिचर, मायावी शक्तियों से युक्त तथा कभी-कभी मनुष्यों के प्रति शत्रुतापूर्ण चित्रित किया जाता है — यद्यपि रामायण में विभीषण जैसे धर्मपरायण राक्षस-चरित्र भी वर्णित हैं।
विशेषताएँ
माया (रूप-परिवर्तन) शक्ति, रात्रि में विशेष सक्रियता, विभिन्न वर्णनों में अलौकिक बल।
प्रसिद्ध कथाएँ
रावण (रामायण का केंद्रीय पात्र), विभीषण (रावण के धर्मपरायण भ्राता)।
परंपरा के अनुसार स्वभाव
रामायण में देवताओं एवं ऋषियों के यज्ञों में विघ्न डालने वाले तथा नायकों (राम) से संघर्षरत रूप में वर्णित — परंतु सभी राक्षस-चरित्र एकसमान नहीं (विभीषण इसका प्रमुख अपवाद)।
रक्षा-परंपराएँ
पौराणिक परंपरा के अनुसार रक्षा-मंत्र एवं धर्माचरण को संरक्षण का साधन बताया गया है — यह एक धार्मिक/साहित्यिक अवधारणा है, आधुनिक विज्ञान द्वारा इसकी वास्तविक भौतिक उपस्थिति सिद्ध नहीं है।