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📖 लोक परंपरा naga

नाग

स्रोत: महाभारत (आस्तीक पर्व), पुराण

नाग सर्प-रूपधारी अर्ध-दिव्य प्राणियों का वर्ग हैं, जिन्हें पाताल-लोक (भूमि के नीचे) में निवास करने वाला तथा वासुकि, शेषनाग जैसे प्रमुख नाग-राजाओं से युक्त वर्णित किया जाता है। शेषनाग पर विष्णु के शयन की कथा तथा समुद्र-मंथन में वासुकि की रस्सी के रूप में भूमिका प्रसिद्ध है।

विशेषताएँ

सर्प-रूप अथवा मानव-सर्प मिश्रित रूप, जल एवं भूमि दोनों से संबद्ध।

प्रसिद्ध कथाएँ

शेषनाग (विष्णु-शय्या), वासुकि (समुद्र-मंथन में रस्सी रूप), महाभारत में जनमेजय का सर्प-यज्ञ एवं आस्तीक द्वारा नाग-वंश की रक्षा।

परंपरा के अनुसार स्वभाव

कुछ कथाओं में देवताओं के सहायक, कुछ में मनुष्यों से जटिल/शत्रुतापूर्ण संबंध वाले वर्णित।

रक्षा-परंपराएँ

नाग-पंचमी पर्व पर नाग-देवताओं की पूजा की परंपरा प्रचलित है।

यह विवरण पौराणिक/लोक-परंपरा पर आधारित है — यह किसी वास्तविक, भौतिक रूप से मनुष्य को हानि पहुँचाने वाले प्राणी के अस्तित्व का वैज्ञानिक दावा नहीं है।