मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा जैसे सिंधु घाटी सभ्यता के नगर अपनी व्यवस्थित, ग्रिड-आधारित (जालीनुमा) सड़क-योजना हेतु पुरातत्वविदों द्वारा विशेष रूप से उल्लेखनीय माने जाते हैं — सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, तथा आवासीय, वाणिज्यिक एवं सार्वजनिक क्षेत्रों का विभाजन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह उस काल (लगभग 4500 वर्ष पूर्व) के लिए एक असाधारण रूप से उन्नत नगर-नियोजन क्षमता का प्रमाण है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व-अध्ययनों द्वारा सुस्थापित है।

परवर्ती काल में भी मयमतम् एवं मानसार जैसे वास्तु-ग्रंथों में नगर-नियोजन के सैद्धांतिक दिशा-निर्देश (जैसे "वास्तु पुरुष मण्डल" पर आधारित नगर-संरचना) प्राप्त होते हैं, यद्यपि इनके व्यावहारिक क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष पुरातात्विक साक्ष्य सिंधु घाटी सभ्यता जितना व्यापक नहीं है।