सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग ई.पू. 2500) के नगर मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा में अत्यंत व्यवस्थित जल-निकासी एवं स्वच्छता-व्यवस्था के पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं — ढके हुए नाले, व्यक्तिगत स्नानघर एवं "महान स्नानागार" (Great Bath) जैसी संरचनाएँ उस काल के लिए असाधारण नगर-योजना दर्शाती हैं, जिसे पुरातत्वविदों ने विस्तार से दस्तावेज़ीकृत किया है।
परवर्ती काल में बावड़ियों (स्टेपवेल) की परंपरा — जैसे गुजरात की रानी की वाव (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) — जल-संचयन एवं सामुदायिक जल-प्रबंधन की उन्नत परंपरा को दर्शाती है, जो शुष्क क्षेत्रों में वर्ष-भर जल-उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु विकसित की गई थी।